यह है 10 बातें महात्मा बुद्ध से संबंधित जिन्हे जानकर चौक जाएंगे आप ।

महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक जिन्होने सारी दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया, अंगुलीमाल जैसा क्रूर राक्षस भी जिनके तेज के सामने नतमस्तक हो गया । सम्राट अशोक ने कलिंग में भयंकर नरसंघार देखा तो उसका मन द्रवित हो गया, आत्मग्लानि से मुक्ति के लिए उसने भी बुद्धत्व की शरण ली । हिंदू धर्म में व्याप्त अहिंसा के मूल में भी महात्मा बुद्ध की ही शिक्षाएं हैं । प्रस्तुत हैं ऐसे महान महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े कुछ अनजाने तथ्य जिन्हे जानकर निश्चित है कि आप चौंक जाएंगे ।

1. महात्मा बुद्ध के पिता अस्थाई राजा थे ।

समान्यतः राजा का मतलब हम समझते हैं ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें एक परिवार या वंश का राजा होता है फिर उसका पुत्र शासन करता है, ऐसा वंशानुगत रूप से चलता रहता है स्थाई रूप से , परंतु महात्मा बुद्ध ने जिस राज्य में जन्म लिया था वह ऐसी शासन व्यवस्था नहीं थी । शाक्य राज्य भारत के उत्तर पूर्व कोने में था । शाक्यो की राजधानी का नाम कपिलवस्तु था । कपिलवस्तु के शाक्यो की शासन पद्धति के बारे में इतिहास में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है । हम नहीं जानते कि वहां प्रजातंत्र था अथवा कुछ लोगों का शासन था परंतु निश्चयपूर्वक कह सकते हैं कि स्थाई रूप से एक राजपरिवार शासन नही करता था । शाक्यो के जनतंत्र में कई राज परिवार थे और वे एक दूसरे के बाद क्रमशा शासन करते थे । राज परिवार का मुखिया राजा कहलाता था। सिद्धार्थ गौतम के जन्म के समय शुद्धोदन के राजा बनने की बारी थी । शुद्धोदन बड़ा धनी आदमी था । उसके कई महल थे , उसके पास बड़े-बड़े खेत और अनगिनत नौकर-चाकर थे । कहा जाता है अपने खेतों को जोतने के लिए उसे एक हजार हल चलवाने पड़ते थे ।

2. सिद्धार्थ गौतम की गृह त्याग की प्रचलित कहानी झूठी ।

शाक्यो के राज्य से सटा कोलियों का राज्य था । रोहिणी नदी राज्य की विभाजन रेखा थी । दोनों राज्य रोहणी नदी के जल से अपनी फसल को सींचते थे । हर फसल में उनका विवाद होता था । विवाद युद्ध की स्थिति में परिवर्तित हो गया, सिद्धार्थ गौतम ने युद्ध के निर्णय का विरोध किया , उन्होंने आपसी बातचीत से विवाद को सुलझाने का प्रस्ताव रखा । राज्य की सेनापति ने इसका विरोध किया । संघ के सदस्यों का मत लिया गया और सिद्धार्थ गौतम का मत बड़े बहुमत से अमान्य हो गया । दूसरे दिन सेनापति ने शाक्य संध की दूसरी सभा बुलाई और राज्य के सभी युवा 20 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम को युद्ध में भाग लेने हेतु सेना में अनिवार्य भर्ती की घोषणा कर दी । सिद्धार्थ गौतम ने बहुमत के सामने ना झुककर सैनिक भर्ती का विरोध किया और युद्ध में भाग ना लेने की घोषणा की । सिद्धार्थ गौतम कि घोषणा स्वरूप सेनापति ने कहा कि संघ अपनी आज्ञा की अवहेलना करने के जुर्म में तुम्हारे परिवार का सामाजिक बहिष्कार का निर्णय कर सकता है और संघ तुम्हारे परिवार के खेत जप्त कर सकता है । तदानुसार सिद्धार्थ गौतम ने संघ को संबोधित करते हुए कहा कि कृपया मेरे परिवार को दंडित न करें सामाजिक बहिष्कार द्वारा उन्हे कष्ट ना दें ,वह निर्दोष हैं , मैं अपराधी हूं चाहे मुझे फांसी पर लटका दे या देश से निकाल दें । इन परिस्थितियों में गौतम सिद्धार्थ ने गृह त्याग किया और परिव्राजक बनने का निर्णय लिया । उनके राज्य छोड़ने के बाद युद्ध के विरोध में शाक्यो में बड़ा आंदोलन छिड़ा । कोलिय , शाक्य भाई-भाई के नारे लगे परिणाम यह हुआ दोनों राज्यों के लोगों ने संयुक्त पंचायत की नियुक्ति का निर्णय लिया इस प्रकार युद्ध का खतरा सदा के लिए शांत हो गया ।

3. महात्मा बुद्ध को मांस खाना पसंद था ।
जो दयावान है वह किसी प्राणी की हत्या नहीं करता और प्राणियों के जीवन को सुरक्षित रखता है
” महात्मा बुद्ध ”
आमगन्ध नाम का एक ब्राम्हण तपस्वी ने प्रश्न किया आप दूसरों के दिए हुए दूसरों के द्वारा तैयार किए गए बढ़िया-बढ़िया समिष भोजन ग्रहण करते हैं , जो इस प्रकार का चावल ,(मांस) का पुलाव खाता है वह आम-गंध खाता है आप पक्षी के मांस के साथ पका हुआ बढ़िया चावल खाते हैं और कहते हैं कि मुझ पर आम,-गंध का दोष नहीं होता ।
तथागत ने उत्तर दिया – ” जीव हिंसा करना ,पीटना , काटना , बांधना , चुराना , झूठ बोलना ,ठगना , वंचना करना , अनुपयोगी जानकारी तथा व्यभिचार – यह आम-गंध है ,मांस का खाना नहीं ।
एक अन्य घटना में एक ब्राह्मण ने महात्मा बुद्ध से प्रश्न किया यद्यापि आप कहते हैं कि आप मुर्दार मांस नहीं खाते लेकिन आप पक्षियो के मांस का बना हुआ एक से एक बढ़िया भोजन कर लेते हैं आपसे पूछता हूं कि मुर्दार मांस किसे कहा जाता है ?
तथागत ने उत्तर दिया किसी प्राणी की हत्या करना किसी का अनुच्छेद करना ,मारना-पीटना , बंधन ,चोरी ,झूठ बोलना ,ठगी , व्यभिचार ये सब मुर्दार मांस हैं ।
( पूर्णतः विरोधाभाषी व्याख्यान )

4. अनोखी परिस्थितियों में सिद्धार्थ गौतम का जन्म

महात्मा बुद्ध की माता महामाया ने बोधिसत्व को दस महीने तक अपने गर्भ में धारण किए रही । समय समीप आने पर उन्होंने मायके जाने की इच्छा प्रकट की । देवदह के मार्ग में महामाया को शाल- वृक्षों के एक उद्यान वन से गुजारना था यह लुंबिनी वन कहलाता था । मनोरम उद्यान देखकर महामाया के मन में इच्छा उत्पन्न हुई कि वह कुछ समय वहां रहे और क्रीड़ा करें महामाया पालकी से उतरी और एक सुंदर शाल वृक्ष ओर बढ़ी । वृक्ष की शाखाएं ऊपर नीचे हिल डुल रही थी । महामाया ने उसे पकड़ना चाहा भाग्यवश एक शाखा काफी नीचे झुक गयी । महामाया ने पंजों के बल खड़े होकर उसे पकड़ लिया । तुरंत शाखा ऊपर उठी और उसका हल्का सा झटका लगने से महामाया को प्रसव वेदना आरंभ हुई । उस साल वृक्ष की शाखा पकड़े खड़े-खड़े महामाया ने एक पुत्र को जन्म दिया ।ईस प्रकार 563 ई पू में वैशाख पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ ।

5. ईश्वर में विश्वास न रखने वाले महात्मा बुद्ध आज स्वयम् ईश्वर बन गये ।

महात्मा बुद्ध के ईश्वर के बारे में विचार । जैसे कोई अंधो की कतार हो । न आगे आगे चलने वाला अंधा देख सकता हो, न बीच में चलने वाला न देख सकता हो और ना पीछे चलने वाला अंधा देख सकता हो-
क्या यह ठीक है ऐसा ही नहीं है जैसे किसी आदमी का किसी स्त्री से प्रेम हो गया हो जिसे उसने कभी देखा ना हो ।
यदि ईश्वर शिव है कल्याण स्वरूप है तो आदमी हत्यारे , चोर , व्यभिचारी ,झूठे , चुगलखोर , बकवादी , लोभी , द्वेषी और कुमार्गी क्यों हो जाते क्या किसी अच्छे ,भले , शिवस्वरूप ईश्वर के रहते यह संभव है ?
यदि कोई ऐसा महान सृष्टिकर्ता जो न्यायी भी है और दयालु भी है , तो संसार में इतना अन्याय क्यों हो रहा है ?
जो तथागत ईश्वर के अस्तित्व के सिद्धांत के इतने खिलाफ थे आज उन्हीं तथागत को बौद्ध धर्मावलम्बीयो ने ईश्वर स्वरूप पूजना शुरू कर दिया ।

6. उन्हे दरिद्रता नापसंद थी ।

7. चरित्रहीनता का आरोप ।

“बहन ! यदि तू हमारा कुछ भला करना चाहती है , तो अपने प्रयास से श्रवण के बारे में आपवाह फैला दे जिससे वह जनप्रिय ना रहे । बहुत अच्छा इस विषय में आप मुझ पर निर्भर रहे ‘ कह वह वहां से चल दी। ‘ स्त्री चरित्र ‘ दिखाने में चिंचा परांगत थी जब लोग जेतवन से बुद्ध के प्रवचन सुनकर लौटने वाले होते, तो रक्तावरना चिंचा हाथ में फूलों की माला और सुगंधीया लिए जेतवन की ओर जाती दिखाई देती ।
यदि कोई प्रश्न करता- इस समय कहां जा रही है ? वह उत्तर देती , ” तुम्हें इस से क्या लेना-देना ” जेतवन के समीप तीर्थिकाराम में रात बिताकर वह सुबह के समय शहर की ओर लौटती , जब शहर के लोग बुद्ध के दर्शनार्थ जेतवन की ओर जाते होते । यदि कोई उससे पूछता- ” रात कहां बिताई ” वह उत्तर देती, तुम्हें इस से क्या लेना-देना मैंने जेतवन में श्रमण गौतम के साथ (उसकी )गंध कुटी में रात बिताई । किसी किसी के मन में कुछ शंका पैदा हो जाती । चार महीने बीतने पर उसने अपने पेट के इर्द-गिर्द कुछ कपड़े चिथड़े लपेट कर उसे ऊँचा कर लिया और कहना आरम्भ किया कि श्रवण गौतम से उसे गर्भ ठहर गया है । कोई कोई शायद विश्वास भी कर लेते थे । नवे महीने में उसने अपने पेट पर एक लकड़ी का टुकड़ा बांध लिया और विषैले कीड़ों से देह काटाकर हाथ पैर फुला लिए और जिस समय तथा जिस स्थान पर भगवान बुद्ध वृक्षों और ग्रंथों को प्रवचन दे रहे थे वही पहुंचकर कहने लगी ” हे महान उपदेशक ! तुम लोगों को बहुत उपदेश देते हो तुम्हारी वाणी बहुत मधुर है और तुम्हारे होंठ बड़े कोमल हैंं। तुम्हारे संसर्ग से मुझे गर्भ ठहर गया है और मेरा समय नजदीक आ गया है । भगवान बुद्ध ने अपना प्रवचन बीच में रोककर बड़ी गंभीरता से उत्तर दिया -” बहन ! तूने जो कहा है उस के सत्यासत्य का ज्ञान केवल मुझे और तुझे ही है । ” चिंचा जोर जोर से खांसते हुए बोली- हां हां, ऐसी बात का ज्ञान हम दोनों को ही हो सकता है ।” उसके खांसने से वह गांठ जिससे उसने वह लकड़ी पेट पर बांधी हुई थी, ढीली पड़ गई और वह लकड़ी खिसक कर पांव पर आ पड़ी । चिंचा कहीं कि ना रह गई लोगों ने उसे डंडे और पत्थर मार-मारकर वहां से भगा दिया ।

8. महात्मा बुद्ध का सबसे बड़ा दुश्मन ।

देवदत्त भगवान बुद्ध का चचेरा भाई था लेकिन आरम्भ से ही उसे उनसे ईर्ष्या थी और वह अंतिम दर्जे की घृणा करता था ।
एक बार भगवान बुद्ध गृध्रकूट पर्वत की छाया में ऊपर नीचे चहल-कदमी कर रहे थे । देवदत्त ऊपर चढ़ा और जाकर एक भारी पत्थर नीचे लुढ़का दिया ताकि तथागत का प्रणांत हो जाए । लेकिन वह पत्थर जा कर एक दूसरे स्थान पर गिरा और वह गड़ गया । उसकी एक छोटी सी पच्चर आकर तथागत के पांव में लगी जिससे रक्त बहने लग गया । उसने भगवान बुद्ध की जान लेने का दूसरी बार भी प्रयास किया । इस बार देवदत्त राजकुमार अजातशत्रु के पास गया और बोला- मुझे कुछ आदमी दो ।”और अजातशत्रु ने अपने आदमियों को आज्ञा दी कि देवदत्त का कहना करें ।तब देवदत्त ने एक आदमी को आदेश दिया – जाओ श्रवण गौतम अमुक जगह है । जाकर उसे जान से मार आओ । ‘आदमी जाकर वापस लौट आया और बोला-” मैं तथागत का प्राण लेने में असमर्थ हूँ ।”देवदत्त ने भगवान बुद्ध की हत्या करने के धनुष बाण धारियों को भी कहा उसने मदमस्त हाथी भी छुड़वाया लेकिन वह असफल रहा । जब लोगों को उसके इन दुष्ट प्रयासों की जानकारी हो गई तो जनता ने उसका सारा लाभ यश बंद कर दिया और राजा अजातशत्रु ने भी उससे मिलना जुलना बंद कर दिया । अपनी करतूतों से अप्रिय बन जाने के कारण देवदत्त मगध छोड़कर कोशल जनपद चला गया । वहां उसे राजा प्रसेनजित से आशा थी । लेकिन राजा प्रसन्नजित ने भी उसे घृणा की दृष्टि से देखा और वहां से भगा दिया ।

9. परिनिर्वाण के सातवें दिन अग्नि संस्कार हुआ ।

तब कुसीनारा के मल्लो ने आनंद स्थविर से पूछा- “अब तथागत के शरीर के प्रति क्या करणीय है ? आनंद स्थविर का उत्तर था- जैसे लोग राजाओं के राजा- महाराजाओं- की दाह-क्रिया करते हैं , वैसे ही तथागत की होनी चाहिए ।”

मल्ल बोलेः-” ऐसा ही होगा ।”
तब मल्लो ने कहाः आज तथागत के शरीर की दाह क्रिया करने के लिए बहुत विलंब हो गया है । हम इसे कल करें । तब कुसीनारा के मल्लो ने अपने आदमियों को आज्ञा दी- तथागत की अंतेष्टि की तैयारी करो । सुगंधियों फूलों तथा कुशीनारा के बाजा बजाने वालों का संग्रह करो । लेकिन तथागत के शरीर के प्रति आदर सत्कार गौरव प्रदर्शित करते हुए तथा उनकी पूजा करते हुए नृत्यो द्वारा, गीतो द्वारा ,बाजो द्वारा, फूल मालाओं द्वारा और सुगंधियो द्वारा तथा कपड़ा की चन्दवे बनाते हुए और उस पर लटकाने के लिए फूलों की माला गूंथते हुए उन्होंने दूसरा दिन भी गुजार दिया इसी प्रकार तीसरा चौथा पांचवा और छठा दिन भी ।

तब सातवें दिन कुशीनारा के माल्लो ने सोचा आज हम तथागत के शरीर को ले चले आज हम उनकी अंतेष्टि कर लें ।
तदनन्तर मल्लों के मुखियो ने सिर से स्नान किया, नए वस्त्र पहने ताकि वे तथागत की अर्थी को कंधा लगा सकें ।

वह तथागत को मुकुट बंधन स्थान पर ले गए जहां नगर की पूर्व की ओर मल्लो का चैत्य था । वहां तथागत के शरीर को रखकर अग्नि स्पर्श करा दिया गया ।
कुछ समय बाद तथागत की नश्वर देह राख परिणत हो गई ।

10 . भगवान बुद्ध के ‘ फूलों ‘ के लिए कलह । जब तथागत का शरीर अग्नि द्वारा भस्म में परिणत कर दिया गया कुशीनारा के मल्लों ने समस्त राख और अस्थियाँ इकट्ठा कर लीं और अपने संथागार में रखकर उन्हें भालो से घेर दिया और उन पर धनुर्धारियो का पहरा बैठा दिया ताकि कोई उस का एक हिस्सा भी चुरा कर न ले जा सके । सात दिन तक मल्लो ने नृत्य, गीत, वाद्य,माला तथा सुगन्धियो द्वारा उनके प्रति आदर , सत्कार गौरव प्रदर्शित किया और उनकी पूजा कि । जब मगध नरेश अजातशत्रु ने समाचार सुना कि कुशीनारा में तथागत परिनिर्वाण को प्राप्त हो गए । इसलिए उसने मल्लो के पास अपना दूत भेजा ताकि उसे कृपया अवशेषों में से एक हिस्सा दें । इसी प्रकार वैशाली के लिच्छवियो ने अपना दूत भेजा, कपिलवस्तु के शाक्यो ने भेजा । रामगाम की कोलियों ने भेजा था तथा पावा के मल्लो ने भेजा ।

अस्थियो का हिस्सा मांगने वालों में वेठ द्वीप का एक ब्राह्मण भी था । जब कुशीनारा के मल्लो ने इनकी मांगे सुनी तो वह बोलेः- हमारी सीमा में तथागत का परिनिर्वाण हुआ है । हम किसी को कोई भी हिस्सा नही देंगे । इस पर केवल हमारा अधिकार है ।परिस्थिति को बिगड़ते देख कर द्रोण नाम के एक ब्राह्मण ने मध्यस्थता की । बोला–‘ मेरे दो शब्द सुन लें ।” द्रोण बोला –” तथागत में शांति और सहनशीलता की शिक्षा दी है । यह उचित नहीं है कि उन्ही तथागत की अस्थियो के लिए— जो प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ थे– झगड़ा हो, कलह हो , लडा़ई हो । हम सब सहमत होकर अस्थियों को आठ बराबर हिस्सों में बांटे और हर जनपद में उन पर स्तूप बनाऐ जायें ताकि जनपद में उनकी पूजा हो सके ।”

कुशीनारा की मल्ल सहमत हो गये । बोले :- अच्छा तो ब्राम्हण ! तू ही इन्हे सही-सही आठ बराबर हिस्सों में बांट दें ।”

” बहुत अच्छा ” कह द्रोण ने स्वीकार किया ।
उसने तथागत के अवशेषों के बराबर बराबर आठ हिस्से कर दिए । बंटवारा कर चुकने पर उसने कहा कि मुझे यह बर्तन मिल जाये, तो मैं इस पर एक स्तूप बनवाऊंगा । सब ने मिलकर ब्राह्मण को बर्तन देना स्वीकार किया । इस प्रकार तथागत की अस्थियों के हिस्से हो गए और जिस झगड़े का अंदेशा था, मैं शांति से निपट गया ।

( प्रस्तुत लेख डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर की पुस्तक भगवान बुद्ध और उनका धर्म से उद्धरित है )

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यह हैं 10 बातें डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर के बारे में जिन्हें जानकर चौंक जाएंगे आप ।

डॉ अंबेडकर की पहचान हिंदुस्तान में संविधान निर्माता के रूप में है । उन्हें अछूत पिछड़ों के मसीहा के रूप में जाना जाता है । जातियां जो भारतीय समाज में हजारों साल से असमानता का दंश झेल रही थी उन्हें डॉ अंबेडकर ने समानता का अधिकार दिलाया । आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ अंबेडकर का योगदान अतुलनीय है । प्रस्तुत है डॉ अंबेडकर से संबंधित कुछ अनजाने तथ्य जो आपकी उनके बारे में धारणा को काफी परिवर्तन करेंगे ।

1. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में प्रमुख भूमिका।

भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में डॉक्टर अंबेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी RBI डॉ अंबेडकर द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के आधार पर बनाया गया था । उनकी पुस्तक” रुपए की समस्या और समाधान” को व्यापक रूप से आर बी आई के गठन के दौरान संदर्भित किया गया था ।

2. श्रमिकों की कार्य अवधि समय निर्धारण ।

डॉ अंबेडकर ने 7 वे इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस में श्रमिकों की काम करने की अवधि को 14 घंटे से घटाकर 8 घंटे कर दिया ।

3. मध्य प्रदेश और बिहार को विभाजित करना ।

1955 में डॉ अंबेडकर ने मध्य प्रदेश और बिहार को बेहतर शासन व्यवस्था और विकास के लिए विभाजित करने का सुझाव दिया । जो कि 45 साल बाद अमल में लाया गया । मध्य प्रदेश से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ का, बिहार से विभाजित होकर झारखंड का निर्माण हुआ ।

4. डॉ अंबेडकर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 का सख्त विरोध किया था ।

डॉ अंबेडकर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया था जो जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता है ।

5. महिला समानता अधिकार में अग्रणी योगदान ।

उन्होंने 1952 में कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया क्योंकि हिंदू कोड बिल पारित नहीं हुआ था । उन्होंने विरासत और विवाह में महिलाओं को समानता के अधिकार के लिए बहस किया था । बाद में इन कानूनों को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अधिनियमित किया गया था ।
उन्होंने हिंदुओं में बहुविवाह को समाप्त किया और महिलाओं को संपत्ति का अधिकार प्रदान किया ।

6. बाँध प्रौद्योगिकी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका।

डॉ अंबेडकर ने भारत में बड़े बाँध प्रौद्योगिकी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन्होने दामोदर, हीराकुंड और सोन नदी परियोजनाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया ।

7. डाँ अम्बेडकर इस्लाम के कटु आलोचक थे ।

मुस्लिम भ्रातृभाव केवल मुसलमानों के लिए-”इस्लाम एक बंद निकाय की तरह है, जो मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के बीच जो भेद यह करता है, वह बिल्कुल मूर्त और स्पष्ट है। इस्लाम का भ्रातृभाव मानवता का भ्रातृत्व नहीं है, मुसलमानों का मुसलमानों से ही भ्रातृत्व है। यह बंधुत्व है, परन्तु इसका लाभ अपने ही निकाय के लोगों तक सीमित है और जो इस निकाय से बाहर हैं, उनके लिए इसमें सिर्फ घृणा ओर शत्रुता ही है। ( डॉ अंबेडकर की बुक Pakistan or partition of india से उद्धृत ।

8.” Annihilation of Caste ” जाति प्रथा का विनाश , एक ऐसा भाषण जो लिखा गया पर कभी बोला नहीं गया ।

9. सन 1952 में डॉ अंबेडकर अपने पहले लोकसभा लोकसभा चुनाव में पराजित हुए ।

डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर अपना पहला लोकसभा चुनाव उत्तरी बंबई से लड़े ,परंतु वह अपने पूर्व सहायक कांग्रेस के प्रत्याशी नारायण काजोलकर से चुनाव हार गए । डॉक्टर अंबेडकर राज्यसभा सदस्य बने । 1954 के उप चुनाव में खड़े हुए परन्तु इस बार फिर उन्हे पराजय का सामना करना पड़ा वे तीसरे स्थान पर रहे । कांग्रेस पार्टी विजयी रही ।

10. डॉ अंबेडकर की आत्मकथा ” waiting for visa ” कोलंबिया विश्वविद्यालय पाठ्यपुस्तक ।

डॉ अंबेडकर की आत्मकथा ” waiting for visa ” जिसे उन्होंने 1935-36 में लिखा कोलंबिया विश्वविद्यालय में पाठ्यपुस्तक के रूप में शामिल है । यह 20-पृष्ठ की आत्मकथात्मक जीवन कथा है , इसमें अम्बेडकर की यादें हैं, जो उनके स्वयं के लेखन में अस्पृश्यता के साथ उनके अनुभवों से संबंधित हैं।

यह है 10 सबसे विवादित किताबें जो भारत में प्रतिबंधित है । ( कुछ पर से बैन हटा दिया गया ) ।

कुछ किताबें व्यक्ति विशेष का, समाज का, धर्म का ऐसा वर्णन करती है जिससे लोगों की भावनाएं आहत होती । यह एक दूसरा मुद्दा है कि किताब जो भी प्रतिबंधित की गई या विवादित हुई लेखक को अपमान धमकी विरोध का सामना करना पड़ा वह सत्य पर आधारित थी या असत्य पर । कभी-कभी सत्य लिखने वाले लेखकों को भी विरोध , प्रतिबंध का सामना करना पड़ा । यहां तक कि अपनी जान गवानी पड़ी ।

1. The Satanic Versus by Salmaan Rushdie

कथित तौर पर पैगंबर का अपमान करने के लिए प्रतिबंधित ।

मक्का में एक पूर्व इस्लामिक परंपरा के तहत देवीया लात, उज्जा और मनात की पूजा की जाती थी । जिन्हे स्वीकार करते हुए मोहम्मद पैगंबर ने कुरान में पंक्तियां जोड़ी, बाद में मोहम्मद ने अपनी बात से असहमत होते हुए कहा कि शैतान ने उन्हें यह बोलने के लिए उकसाया।

इसलिए उन्हें शैतानी पंक्तियां कहा गया । किताब का शीर्षक इसी संदर्भ में है । प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी की यह किताब 1988 में प्रकाशित हुई । मुस्लिम समुदाय ने इस किताब को मोहम्मद को अपमानित करने वाली बताया और काफी रोष जताया। ईरान के धार्मिक नेता आयतुल्लाह खोमैनी ने फतवा जारी कर दिया । सलमान रुश्दी को जान से मारने के कई प्रयास किए गये । इस नाँवेल के जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी की हत्या कर दी गई थी । भारत नें सबसे पहले इस बुक को बैन किया । दुनिया के कई देशो में यह नाँवेल प्रतिबंधित है ।

2. रंगीला रसूल

कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के लिए प्रतिबंधित

यह किताब 1927 में पंडित एम ए चामूपति या कृष्ण प्रसाद प्रताप नामित आर्य समाजी द्वारा लिखी गई । जिसकी पहचान प्रकाशक द्वारा कभी उजागर नहीं की गई। इस पुस्तक के प्रकाशक महाशिराजपाल को मारने के कई असफल प्रयासों के बाद 6 अप्रैल 1929 को इल्म-उद-दीन नामक एक युवक द्वारा छुरा घोंपकर उनकी हत्या कर दी गई । यह पुस्तक मूल रूप से उर्दू में लिखी गई थी । बाद में इसका हिंदी अनुवाद किया गया । यह पुस्तक भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रतिबंधित है ।

3. The Polyester Prince: The Rise of Dhirubhai Ambani –

अंबानी परिवार की छवि को खराब करने के लिए प्रतिबंधित।। पुस्तक में अंबानी के गुजरात में विद्यालय के शिक्षक के बेटे से एक कारोबारी टाइकून बनने तक की सफर की व्याख्या है। यह राजनीति पर अंबानी के प्रभाव और उनके खिलाफ किए गए कुछ आरोपों का दस्तावेज था । धीरूभाई अंबानी की अनौपचारिक जीवनी को छपने ही नहीं दिया गया और 1988 में ही प्रतिबंधित कर दिया गया।

4. लज्जा ( lajja by Taslima Nasreen )

मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचाने की वजह से यह उपन्यास प्रतिबंधित ।
यह उपन्यास 1993 में पहली बार प्रकाशित हुआ । इस्लामी कट्टरपन और बर्बरता को दुनिया के सामने लाने के कारण इस उपन्यास को इस्लाम की छवि को खराब करने वाला घोषित कर लेखिका के खिलाफ मौलवियों ने सजाए मौत के फतवे जारी किए । उपन्यास बांग्लादेश में लगभग 6 महीने बाद प्रतिबंधित कर दिया गया । बांग्लादेश सरकार ने उन्हें देश निकाला दे दिया । वे भारत में शरणार्थी बनकर रहीं , यहां भी उन्हें कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा काफी विरोध का सामना करना पड़ा ।

5. The Hindus: An Alternative History

हिंदू देवी देवताओं का परिहास बनाने उन्हें अपमानित करने की वजह से प्रतिबंधि

अमेरिकी लेखिका Wendy Doniger की यह बुक भारत में आलोचना का शिकार हुई । लेखिका के विचार में भारतीय मुख्यधारा का इतिहास पुरुष, ब्राह्मण और गोरे प्राच्यविदो द्वारा लिखा गया । Doniger ने महिलाओं , कुत्तों , घोड़ों और जातियों के दृष्टिकोण से हिंदू धर्म के इतिहास को चित्रित किया । 2011 में दीनानाथ बत्रा ( शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के संस्थापक )द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए के तहत मुकदमा दायर किया गया था ।
(जो कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को अपमानित करने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण कृतियों को मना करता है ।) इसके बाद पुस्तक को भारतीय बाजार से वापस ले लिया गया और प्रकाशक पेंगुइन इंडिया ने 6 महीनों के भीतर सभी मौजूदा प्रतियो को नष्ट करने पर सहमति व्यक्त की ।

6. Lady Chatterley’s Lover by D.H. Lawrence

उपन्यास में सेक्स का अश्लील विवरण और अभद्र भाषा का प्रयोग होने के कारण प्रतिबंधित ।

Lady Chatterley’s Lover डी एच लॉरेंस द्वारा 1928 में लिखी एक उपन्यास है सुस्पष्ट यौन दृश्यो के कारण पुस्तक चर्चित और विवादित हुई । कहानी में प्रेमी एक श्रमिक वर्ग का पुरुष है और प्रेमिका एक कुलीन महिला है । संभवतः इस विषय में भी पुस्तक को चर्चित और विवादित किया । उपन्यास में fuck और cunt जैसे शब्दों को लगातार इस्तेमाल किया गया , जो की आपत्ति का कारण बना । उपन्यास को अश्लील करार देते हुए यूनाइटेड स्टेट , कनाडा , ऑस्ट्रेलिया , इंडिया और जापान में प्रतिबंधित कर दिया गया ।

7. Shivaji: Hindu King in Islamic India by James Laine .

मुंबई हाई कोर्ट के अनुसार सामाजिक शत्रुता को बढ़ावा देने वाली सामग्री के लिए प्रतिबंधित है।

इस पुस्तक के बयान जिसने सबसे अधिक लोगों को क्रोधित किया । यह उल्लेख कि शिवाजी के पिता शाहजी नहीं थे । laine लिखते हैं कि “महाराष्ट्रीयन शरारत ” में यह चुटकुला कहते हैं कि शिवाजी के जैविक पिता दादोजी कोंडदेव थे ।( उद्घृत उदाहरण के लिए द टेलीग्राफ में 18 जनवरी ) यह बयान वास्तव में , यहां तक कि सुझाव जाहिर तौर पर शिवाजी , शहजी और शिवाजी की मां जीजाबाई (सभी अत्यधिक श्रद्धेय ) को अत्यधिक अपमानित करता है और मानहानि माना जाता है । दावा भी व्यापक रूप से निराधार और आयोग्य माना जाता है । जिस शरारती चुटकुले या मजाक का जिक्र लेखक ने किया है ( कोई सामने नहीं आ रहा जिससे ऐसा मजाक सुना हो ) । अमेरिकन प्रोफेसर laine ने इस बुक से संबंधित कुछ रिसर्च The Bhandarkar Oriental Research Institute में किया । उन्होंने संस्थान और कुछ विद्वानों को अपनी पुस्तक में आभार प्रकट किया । उन सभी को शिवसेना कार्यकर्ताओं के रोष का सामना करना पड़ा ,संस्थान पर भी हमला हुआ । कांग्रेस सरकार ने 2007 में बुक को बैन कर दिया परंतु मुंबई हाई कोर्ट ने बैन हटा दिया ।

8. Understanding Islam Through Hadis Religious Faith Or Fanaticism ?

इस्लाम को अपमानित करने के लिए भारत में प्रतिबंधित ।
इस किताब के लेखक रामस्वरूप है ,वे इस्लाम , ईसाईयत और साम्यवाद के आलोचक रहे । यह पुस्तक सबसे पहले 1982 में अमेरिका में प्रकाशित हुई । इनके मित्र सीताराम गोयल ने 1987 में किताब को हिंदी में छापा । पुलिस ने हिंदी की सारी प्रतिया जप्त कर ली और सीताराम गोयल को अरेस्ट कर लिया गया । इस पुस्तक को मुस्लिमों के लिए अपमानजनक माना गया और 1990 में हिंदी अनुवाद को बैन कर दिया गया । मार्च 1991 में इंग्लिश वर्जन को भी बैन कर दिया गया ।

9. Great Soul: Mahatma Gandhi and His Struggle with India

इस पुस्तक के लेखक Pulitzer Prize-winner Joseph Lelyveld हैं । इस पुस्तक के अनुसार महात्मा गांधी का जर्मन बॉडीबिल्डर Hermann Kallenbach के साथ यौन संबंध थे । यह पुस्तक 21 मार्च 2011 को बैन कर दी गई । यूनियन लॉ मिनिस्टर वीरप्पा मोइली ने केंद्र को अप्रत्यक्ष रूप से सुझाव दिया कि उसे भी बुक को बैन कर देना चाहिए । महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी, राजमोहन गांधी, गोपाल कृष्ण गांधी ने पुस्तक के विरोध किया । 4 अप्रैल को महिला ने बैन हटा दिया ।

10 . power: Kissinger in the Nixon White House.

By Seymour M. Hersh

वह भारतीय प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को CIA का मुखबिर होने का दावा के आरोप में यह पुस्तक प्रतिबंधित है ।

किताब में दावा किया गया कि मोरारजी देसाई को प्रतिवर्ष 20,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया गया था जो कि Lyndon B. Johnson. के समय से शुरू हो गया था । मोरारजी देसाई ने मुंबई हाईकोर्ट से अस्थाई प्रतिबंध के लिए निर्देशन प्राप्त किया । उन्होंने इलिनाइस में अमेरिकी जिला अदालत में अपने वकील महेंद्र मेहता के जरिए इस पुस्तक के लेखक सीमूर हर्ष पर 10 करोड रुपये का मानहानि का दावा कर दिया था ।

ये हैं भारत के 10 सबसे खतरनाक सीरियल किलर, कारनामे जानकर रूह कांप जाएगी आपकी ।

सीरियल किलर

जब कोई हत्यारा हत्या करता है तो उसके पीछे कोई मकसद होता है उसकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी ,लाभ या मजबूरी की स्थिति में वो हत्या करता है ।परंतु सीरियल किलर क्यों हत्या करता है यह सामान्य मानवीय तर्कों से परे की बात है । इनमें से बहुत तो परपीड़ा कामुक होते हैं, वे हत्या करने या दूसरो को पीड़ा देने से आनंदित होते हैं । कुछ केवल छोटे से लाभ के लिए बहुत सी हत्याए करते हैं शायद उनके अंदर से मनुष्यता का ह्वास हो जाता है और दूसरा मनुष्य उनके लिए केवल एक शिकार होता है ।

यह है भारत के 10 सबसे खतरनाक सीरियल किलर कारनामे सुनकर रूह कांप जाएगी आपकी ।
1. बेहराम ठग

शायद ही किसी इंसान ने अपने हाथों से इतनी हत्याए की हो , सन 1765 में जन्मे ठग बेहराम ने अपने जीवन काल में 900 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया तत्कालीन सूत्रों की मानें तो उसने 931 लोगों की हत्या की । 18वीं शताब्दी के आखिर और 19वीं शताब्दी के शुरुआत में जबलपुर और ग्वालियर के आसपास ठगों का एक गिरोह सक्रिय था जिसने केवल धन के लालच में हजारों हत्याएं की। व्यापारी ,लखनऊ की खूबसूरत तवायफे , बारात से लौटते यात्री, तीर्थ यात्रियों के दल , यहां तक कि ईस्ट इंडिया कंपनी की सिपाहियों की टोली सब उस खूंखार अपराधी गिरोह के शिकार बने । उस खूंखार गिरोह का सरदार था ‘ बेहराम ठग ‘ सन 1765 में जन्मे ठग बेहराम ने अपने जीवन काल में 900 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया । तात्कालीन सूत्रों की माने तो उसने 931 लोगों की हत्या की । वह हत्या करने के लिए पीले रुमाल का इस्तेमाल करता था ।

1790 से 1840 तक उसने 931 हत्याए की जो की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है । सन 1840 में उसे अंग्रेज सरकार ने सजा-ए-मौत दे दी । Philip Meadows Taylor ने उसी से प्रेरित होकर फेमस इंग्लिश नोबेल Confessions of a Thug लिखी । इसी बुक पर आधारित विजय कृष्णा आचार्य ने हिन्दी फिल्म बनाई thugs of hindostan जिसमें जिसमें अमिताभ बच्चन ,आमिर खान और फातिमा सना शेख आदि कलाकारों ने अभिनय किया है ।

2 . सुरेंद्र कोली

सुरेंद्र कोली ,इंसान के रुप में नरपिशाच । सन 2006 नोएडा के निठारी गांव कोठी नंबर ,D-5 में जब नर कंकाल मिलने शुरू हुए तो पूरे देश में सनसनी फैल गई। यह बंगला का मनिंदर सिंह पंढेर का था और उस बंगले में बतौर नौकर काम करता था सुरेंद्र कोली । वह शाम ढलते ही गेट के पास से निकलने वाली बच्चियों को झपट्टा मारकर उन्हें बंगले के भीतर कर लेता , मुंह में कपड़ा ठूंस कर उनसे बलात्कार करता फिर मार कर उनका मांस भक्षण करता फिर बचे हुए शव को बंगले के कंपाउंड में दफना देता । दिसंबर 2006 के अंतिम दिनों में नोएडा के D-5 में सिलसिलेवार हो रहे हैं हत्याकांड का खुलासा नोएडा पुलिस ने किया । इलाहाबाद कोर्ट ने इस हैवान सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया । कोर्ट के इस फैसले ने पीड़ित परिवारों को हताश किया ।

3. देवेंद्र शर्मा

पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने दिल्ली यूपी समेत चार राज्यों के 40 लोगों को कत्ल किया ।
देवेंद्र शर्मा ने 2002 से 2004 तक करीब 2 साल के दौरान 4 राज्यों दिल्ली, हरियाणा ,उत्तर प्रदेश और राजस्थान की टैक्सी ड्राइवरों का कत्ल किया । वह टूरिस्ट बनकर गाड़ी में बैठता है और किसी सुनसान रास्ते पर ड्राइवरों को पीट-पीटकर मार देता हत्या करने के बाद उनकी टैक्सी चोरी कर लेता था । 2005 में कमल सिंह टैक्सी ड्राइवर की हत्या के केस में देवेंद्र शर्मा पुलिस के हत्थे चढ़ा । वर्ष 2008 में उसे मौत की सजा हुई ।

4.जयशंकर

शंकर बेहद क्रूरता से हत्या बलात्कार करता था। उसने 19 हत्या और 30 से भी ज्यादा बलात्कार किए । उस पर साइको शंकर नाम से 2017 में एक फिल्म भी बन चुकी है । 41 साल के जयशंकर सलेम जिले का रहने वाला एक ट्रक ड्राइवर था। ड्राइवरी पेशे के दौरान उसने तमिल , कन्नड़ , हिन्दी भाषा काफी अच्छे से बोलना सीख लिया था । अपने इस हुनर का इस्तेमाल वह शिकार को फसाने के लिए करता था । 23 अगस्त 2009 को शंकर ने एक महिला काँस्टेबल का बलात्कार कर हत्या कर दी । 19 अक्टूबर 2009 को उसे इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया । पुलिस की पूछताछ में मालूम पड़ा कि पहले भी उसने हत्या और बलात्कार की कई घटनाओं को अंजाम दिया था । कुछ समय बाद वह जेल की दीवार तोड़कर भाग गया , दोबारा 2013 में पुलिस के हत्थे चढ़ा । गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पता चला कि इस बीच उसने कई और घटनाओं को अंजाम दिया । 27 फरवरी 2018 को उसने जेल में ही सेविंग ब्लेड से गला रेतकर आत्महत्या कर ली ।

5. रमन राघव

उसे भारत का ‘ जैक द रिपर ‘ कहा गया रमन राघव ने साठ के दशक में मुंबई में करीब 40 से ज्यादा लोगों की हत्या की थी । उस पर निर्देशक अनुराग कश्यप ने रमन राघव 2.0 फिल्म बनाई । इस वहशी ने अपनी बहन के साथ भी रेप किया । वह मुंबई शहर के फुटपाथ पर सोने वाले गरीब , झुग्गियों में रहने वालों को अपना शिकार बनाता था । वह एक मानसिक बीमारी से पीड़ित था Schizophrenia ( मनोविदलता ) इस बीमारी में इंसान असामान्य सामाजिक व्यवहार करता है तथा वास्तविकता पहचानने में असमर्थ रहता है । लगभग 1% लोगों में विकार पाया जाता है । राघव सोते हुए लोगो पर किसी भारी और भोथरे चीज से हमला करता था, जिससे उनकी मौत हो जाती । राघव बहुत कम पढ़ा लिखा लंबा तगड़ा तमिल व्यक्ति था । 27 अगस्त 1968 को रमन राघव को पुलिस ने गिरफ्तार किया उस से पुणे की यरवडा जेल में बंद किया गया था । 1987 में हाई कोर्ट ने उसकी बीमारी के चलते उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया । रमन की 1955 में किडनी की बीमारी की वजह से मौत हो गई । पुलिस ऑफिसर रमाकांत एस कुलकर्णी ने उस पर 2 किताबें लिखी हैं । Footprint on the sands of crime . Crimes , criminal and cops .

6. दरबारा सिंह

हैवानियत का दूसरा नाम दरबारा सिंह उर्फ बेबी किलर। अप्रैल अक्टूबर 2004 के दौरान इसने 23 बच्चों के साथ रेप किया । उनमें से 17 को उसने कत्ल कर दिया । 1952 मैं अमृतसर के ब्यास में जन्मे दरबारा 1975 में पठानकोट के एयर फोर्स स्टेशन का अधिकारी था । उस दौरान उसने एक मेजर के परिवार पर हैंड ग्रेनेड फेक दिया था । बाद में उस को बरी कर दिया गया था । एक प्रवासी मजदूर की बच्ची को मारने के जुर्म में अदालत ने उसे 30 साल की सजा हुई , बाद में उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए सजा को घटाकर 10 साल कर दिया गया । उसकी सजा को कम करना इतनी बड़ी गलती साबित हुई जिसने कई मासूमों की जिंदगी छीन ली । उसने 7 महीने के दौरान 23 बच्चों का अपहरण किया और जिसमें से 17 को उसने हैवानियत का शिकार बना कर मौत के घाट उतार दिया । जिसमें 15 लड़किया और 2 लड़के थे । 7 जनवरी 2008 को दरबारा सिंह को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई ।

7. स्टोन मैन ( Stone man )

भारतीय इतिहास का सबसे रहस्मय हत्यारा । मुंबई पुलिस कभी इस रहस्य को नहीं सुलझा पाई कि कौन था स्टोन मैन । बॉलीवुड में द स्टोन मैन मर्डरस् नामक फिल्म भी इस सीरियल किलर पर बनी । 1985 में एक सीरियल किलर ने एक के बाद एक 13 हत्याए की । सभी हत्या 30 किलो के पत्थर से सर कुचलकर की गई थी इसलिए उस सीरियल किलर को नाम दिया गया था स्टोनमैन । उसने ज्यादातर हत्याएं मुंबई के माटुंगा इलाके में की थी। स्टोन मैन के डर से इस इलाके के लोगों ने रात को घर से निकालना बंद कर दिया था स्टोनमैन सिर्फ फुटपाथ पर अकेले सोने वाले लोगों की हत्या करता था । उसने 2 साल में मुंबई में 13 हत्याएं कि अचानक 1987 में मुंबई में हत्याओं का सिलसिला थम गया । लेकिन सन 1989 में कोलकाता में भी ऐसी ही घटनाएं शुरू हो गयी । और यहां भी निशाने पर वही लोग जो फुटपाथ पर सोते थे , हत्या करने का वही तरीका, वही 30 किलो का पत्थर । हत्यारे ने 6 महीने में 12 हत्याएं की और पुलिस यहां भी उस हत्यारे के बारे में कुछ भी पता नही लगा सकी। कौन था स्टोनमैन । क्या मकसद था उसका इन हत्याओं के पीछे । आज इतने वर्षों बाद भी इन सवालों का कोई जवाब नहीं ।

8. रेणुका शिंदे और सीमा गावित

आजाद भारत की पहली महिला हैं जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी । सीमा नें एक 7 महीने के बच्चे को सिर्फ इसलिए मर क्योंकि वह लगातार रो रहा था । एक 2 साल के बच्चे का सर दीवार से पटक-पटक कर मार दिया फिर लाश के टुकड़े करके थैले में भर दिया और कोल्हापुर की एक थिएटर में बैठकर फिल्म देखी ,ऐसी हैवानियत भरी है इन दो सीरियल किलर बहनों की कहानी । सीमा गावित और रेणुका शिंदे ने 1990 से 1996 के बीच पुणे , थाणे , कोल्हापुर और नासिक जैसे शहरों से बच्चों का अपहरण किया । जब तक बच्चे इन बहनों के आपराधिक उद्देश्य की पूर्ति में सहायक रहते हैं उन्हें जीवित रखती हैं जब बच्चे बड़े हो जाते थे उनके काम के नहीं रहते उनकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर देती । 29 जून 2001 को सेशन कोर्ट ने रेणुका शिंदे और सीमा गावित को 13 बच्चों के अपहरण और 6 बच्चों की हत्या का दोषी पाया ।31 अगस्त 2006 को हाईकोर्ट ने इन दोनों सीरियल किलर बहनों को फांसी की सजा सुनाई । आजादी के बाद भारतीय इतिहास में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई गई थी ।

9. मोहन कुमार साइनाइड

कर्नाटक का कुख्यात सीरियल किलर मोहन कुमार साइनाइड शादी का झांसा देकर महिलाओं को फंसाता और उनकी हत्या कर जेवरात लूट लेता था । शादी के दूसरे दिन वह गर्भ निरोधक गोली खिलाने के बहाने महिलाओं को साइनाइड खिला देता था । 2005 से 2007 के बीच इसी तरह उसने 20 लड़कियों को मार डाला । दिसंबर 2013 में उसे मौत की सजा हुई ।

10. मल्लिका ( Mallika )

देश की पहली लेडी सीरियल किलर । बेंगलुरु की मल्लिका उर्फ साइनाइड मल्लिका का वास्तविक नाम की के जी केपम्मा है । उसने 1999 से 2007 के बीच 6 औरतों का खून किया । कर्नाटक की कग्गलीपुरा गांव की रहने वाली मल्लिका । पहले घरों में नौकरानी का काम करती थी । उसने अमीर बनने के लालच में घरों में चोरी की और पकड़ी गई और उसे 1 साल की जेल हुई । बाद में उसने कमाई का नया तरीका सोच लिया वह अवसादग्रस्त महिलाओं को सहानुभूति दर्शाती , उनकी हमदर्द बनने का नाटक करती । उन्हें दुख निवारण हेतु विशेष पूजा का उपाय बताती । विशेष पूजा क्रिया के लिए मल्लिका महिलाओं को उनके घर से दूर किसी सुनसान स्थान पर बुलाती है और फिर उन्हें खाने की चीजों में साइनाइड मिला कर दे देती थी ,इसके बाद उनके गहने लेकर फरार हो जाती । पुलिस ने उसे 2006 में गिरफ्तार किया । 2012 में कोर्ट ने मल्लिका को मौत की सजा सुनाई जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया ।